संस्कृत प्रार्थना संग्रह

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संस्कृत प्रार्थना संग्रह उन संस्कृत प्रार्थनाओं को साथ सरल हिंदी अर्थ के साथ, एक जगह प्रस्तुत करती है जिन्हें भारतीय घर सचमुच पढ़ता है। 148 पृष्ठ, 10 भाग और 77 अध्यायों में यह उन छह मंत्रों से शुरू होती है जिन्हें लगभग हर कोई आधा-अधूरा जानता है (गायत्री, मृत्युंजय, सर्वे भवन्तु सुखिन:), फिर दैनिक जीवन के मंत्र, परिवार और राष्ट्र की प्रार्थनाएँ, सत्रह पर्व, बारह प्रमुख स्तोत्र, दस गायत्री मंत्र, चार सूक्त, तीन समयबद्ध नित्य पाठ और आठ आरतियाँ—और अंत में चौदह बीज मंत्रों का परिशिष्ट। पुस्तक अपना उद्देश्य स्वयं कहती है: पाठक केवल पाठ न करे, बल्कि उसके भाव, उद्देश्य और जीवन में उसके महत्त्व को भी समझे। इसीलिए संस्कृत हमेशा जोड़े में है—157 मूल पाठ और 223 सरल हिन्दी भावार्थ। भाग 1 से 7 के 66 अध्यायों में से हर एक में ‘कब और क्यों पढ़ें?’ पैनल है जो अवसर बताता है (कुल 285), और हर अध्याय एक पंक्ति के मुख्य संदेश पर समाप्त होता है। भाग 8 इसका व्यावहारिक हृदय है: पाँच, दस या बीस मिनट रखने वाले पाठकों के लिए 5, 9 और 14 पाठों के तैयार नित्य पाठ—ऐसे क्रम जो बदलते नहीं, बढ़ते हैं, इसलिए छोटा पाठ हमेशा बड़े के भीतर ही रहता है। पुस्तक अपने ही शब्दों में विद्वानों के लिए नहीं, बल्कि सामान्य पाठकों, परिवारों, श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए है।

Pages: 148 | ISBN: 978-81-69974-15-8

Language:
Hindi
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What Makes Our Books Different

Original shlokas preserved

Every original Sanskrit verse and mantra is kept in its true form exactly as it has been passed down through the generations.

Simple Hindi explanation

Every teaching is explained in clear, simple Hindi making the wisdom accessible to students, young readers, and every Indian family.

Connected to modern life

We link each teaching to daily living studies, work, relationships, character, leadership, and mental balance.