Sanatana Bodh Purna Sanatan Sangrah (पूर्ण सनातन संग्रह) – Set of 15 Books

Price : ₹4,175.00 USD 44.00

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Sanatana Bodh Purna Sanatan Sangrah (पूर्ण सनातन संग्रह) सनातन ज्ञानधारा की एक संपूर्ण यात्रा है—पंद्रह पुस्तकों का ऐसा संग्रह जो श्रुति और स्मृति से महाकाव्य, प्रार्थना, तीर्थ, शास्त्र और संत-परंपरा तक जाता है: भगवद्गीता, रामचरितमानस, उपनिषद, हनुमान चरित, संस्कृत प्रार्थना संग्रह, वेद, महाभारत, मेरा सनातन, मनुस्मृति, भारत के रहस्यमयी मंदिर, कौटिल्य अर्थशास्त्र, अष्टांग हृदय, सूर्यसिद्धांत, नीम करौली बाबा और भविष्य मालिका पुराण और कालज्ञानम्। Mera Sanatan (633 पृष्ठ) पूरे सनातन धर्म को 10 अध्यायों और 130 विषयों में प्रस्तुत करता है; Ved (280 पृष्ठ) चारों वेदों को 91 अध्यायों और काण्डों में, 132 मंत्रों के सरल अर्थ सहित; Upanishad (284 पृष्ठ) ग्यारह उपनिषद 73 अध्यायों में और परंपरागत 108 आठ वर्गों में; और Bhagavad Gita (452 पृष्ठ) 18 अध्यायों के 338 चयनित श्लोक। Ramcharitmanas (330 पृष्ठ) सातों काण्डों की सम्पूर्ण रामकथा 159 अध्यायों में, और Mahabharat (218 पृष्ठ) पूरे अठारह पर्व 86 प्रसंगों में कहती है; Manusmriti (154 पृष्ठ) 12 भागों और 43 अध्यायों में, तब और अब परिशिष्ट सहित। Kautilya Arthashastra (184 पृष्ठ) 6 भागों और 26 अध्यायों में नेतृत्व, प्रशासन, कूटनीति और अर्थव्यवस्था की शिक्षा देती है; Ashtanga Hridaya (226 पृष्ठ) पाँच शास्त्रीय ग्रंथों से व्यावहारिक आयुर्वेद 37 अध्यायों में—दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार, पचास जड़ी-बूटियाँ और घरेलू उपचार; और Suryasiddhant (142 पृष्ठ) 8 भागों और 40 अध्यायों में भारतीय खगोल विज्ञान, जिनमें से 35 अध्यायों में भारतीय दृष्टिकोण के साथ आधुनिक वैज्ञानिक समझ। Hanuman Charit (162 पृष्ठ) हनुमानजी का जीवन, हनुमान चालीसा और सोलह मंदिर; Sanskrit Prarthana Sangrah (148 पृष्ठ) मंत्र, स्तोत्र, सूक्त और आरतियाँ 223 सरल हिन्दी भावार्थों के साथ; Neem Karoli Baba (134 पृष्ठ) महाराजजी का जीवन और शिक्षाएँ 8 भागों और 52 अध्यायों में; Bhavishya Malika Puran aur Kalagnanam (198 पृष्ठ) ओडिशा की भविष्य मालिका और दक्षिण भारत का कालज्ञानम् 13 भागों और 78 अध्यायों में—मूल कथन, परंपरागत व्याख्या और आधुनिक दावा अलग-अलग रखते हुए; और Bharat Ke Rahasyamayi Mandir 90+ भारतीय मंदिरों की राज्य-वार गाइड, गुफा मंदिरों पर विशेष खंड सहित। चौदह पुस्तकों के परिकल्पनाकार Rajul Bhargava; भारत के रहस्यमयी मंदिर के लेखक श्रीनिवासन आनंद; भगवद्गीता, रामचरितमानस, संस्कृत प्रार्थना संग्रह और सूर्यसिद्धांत का संपादन डॉ. मृत्युञ्जय त्रिपाठी; उपनिषद का डॉ. देवकी नंदन और आचार्य अमित कुमार मिश्र (अमित पयासी); वेद का वंदना चौधरी; महाभारत और अष्टांग हृदय का डॉ. (श्रीमती) कमलेश मलिक; मेरा सनातन का श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी कालिदास जी; मनुस्मृति और कौटिल्य अर्थशास्त्र का डॉ. जयप्रकाश मलिक; और नीम करौली बाबा तथा भविष्य मालिका पुराण और कालज्ञानम् का डॉ. कमलापति तिवारी।

Books: 15 ISBN: 9789394186422, 9789394186507, 9789394186347, 9788169974233, 9788169974158, 9789394186361, 9789394186323, 9789394186484, 9789394186705, 9789364554299, 9788169974172, 9789394186408, 9789394186569, 9788169974219, 9788169974196

Language:
Hindi
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What Makes Our Books Different

Original shlokas preserved

Every original Sanskrit verse and mantra is kept in its true form exactly as it has been passed down through the generations.

Simple Hindi explanation

Every teaching is explained in clear, simple Hindi making the wisdom accessible to students, young readers, and every Indian family.

Connected to modern life

We link each teaching to daily living studies, work, relationships, character, leadership, and mental balance.